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अगले तीन साल में विश्वस्तरीय कैंपस बन कर तैयार हो जाएगा . ...

देश के 16वें मैनेजमेंट संस्थान के रूप में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) बोधगया की शुरूआत 2015 में मगध विश्वविद्यालय कैंपस में शुरू की गई थी। अब इस संस्थान के खुद के कैंपस के निर्माण की प्रकिया शुरू हो गई है। आईआईएम बोधगया का अगले तीन साल में विश्वस्तरीय कैंपस बन कर तैयार हो जाएगा और इसका निर्माण भारत सरकार की एजेंसी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडबल्यूडी) द्वारा कराया जाएगा। इस निर्माण को लेकर बुधवार को दोनो संस्थानों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है। एमओयू साईन से उत्साहित आईआईएम की निदेशक विनीता सहाय ने कहा कि संस्थान को लेकर जो परिकल्पना की थी, वह अब पूरी होने जा रही है और आज का दिन संस्थान के लिए ऐतिहासिक दिन है। इस एमओयू को साईन करने दिल्ली से बोधगया पहुंचे केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के डीजी प्रभाकर सिंह ने कहा कि करीब 225 करोड़ की लागत से तीन साल में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और यहां का निर्माण भगवान बुद्ध की यादों को समेटते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। निर्माण पूरा होने के बाद आईआईएम बोधगया महाबोधि मंदिर का भ्रमण करने के लिए आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को भी यहां आने के लिए आकर्षित करेगी।

 बोधगया के साथ शुरू हुए देश के अन्य आईआईएम के कैंपस निर्माण का काम पहले ही शुरू हो चुके हैं और ​बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय के जमीन को बिहार सरकार द्वारा हस्तांतरित किए जाने के बाद यहां निर्माण का काम शुरू किया जा रहा है। अभी तक मगध विश्वविद्यालय के सामान्य कक्षा और छात्रावास में रहकर पढाई करने वाले आईआईएम के छात्र भी काफी उत्साहित हैं इन छात्रों की मानें तो जो सुविधा उन्हें नहीं मिल पाई है, वह आने वाले छात्रों को जरूर मिलेगी।

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