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एडीजी के औचक निरीक्षण घबराई जनता व स्वयं ख़ाकी वाले भी हलाकान ...

एडीजी के औचक निरीक्षण से घबराई जनता व स्वयं ख़ाकी भी हलाकान परेशान

इन दिनों हेलमेट की बिक्री में भयंकर उछाल आई  है और ये मेहरबानी है कानपुर पुलिस प्रशासन कीकार्यवाही जिसकी सख्त हिदायत के बाद बड़े बड़े शूरमा भी हेलमेट लगाने लगे इसी भौकाल कों देखने के लियें कल घंटाघर से लेकर किदवई नगर तक एडीजी साहब का खौफ कायम रहा कल की कार्यवाही से बड़े बड़े धुरंधरों ने अपने सर का ( हेलमेट )बाहर निकाल लिया कुछ ने तो कार्यवाही देख तत्काल नकली ही सही डुप्लीकेट हेलमेट खरीद लिया । भयंकर वाहन चेकिंग अभियान से इन दिनों वाहन चालकों के दिल में खौफ है।एडीजी की घंटाघर में हुई कार्यवाही ने कई के चलान कटवाये और कई गाड़ी सीज करवाई यहां तक किदवई नगर चौराहे पर अभियान के दौरान सी.ओ.बाबूपुरवा के चालक महेश सिंह कों सिगरेट पीता देख एडीजी साहब भड़क गये और तत्काल उन्हें निलंबित करने के आदेश दे दिये कार्यवाही अभी यही समाप्त नही हुई किदवई नगर थाने के सिपाही ऋषि यादव व रोहित उपध्याय कों भी ड्यूटी के दौरान लापरवाही के चलते लाइन हाजिर कर दिया।एडीजी की कार्यवाही से आम जनता के साथ साथ पुलिस के मन में भी खौफ पैदा हो गया और कल तक चौराहों में कोनों में दुबक कर बैठने वाले सिपाही पसीना बहा रहें है यानी की मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रहें है जिसका नतीजा अब लगभग 90%लोगों ने हेलमेट का उपयोग शुरू कर दिया है अब देखना ये है की प्रशासन का ये अभियान कितना कारगर होता है ?

बड़ा सवाल:

प्रशासन की सख़्ती,वाहन चेकिंग,हेलमेट,सीट बेल्ट पर चालान,यातायात नियमों का बेहतर पालन जनता में जागरूकता जगाना आदि सब कार्य आम जनता की बेहतरी और सुरक्षा के लिये प्रशासन का प्रयास सराहनीय है,हमारा भी दायित्व है प्रशासन का पूर्ण संयोग यातायात नियमों का पालन करे और दुसरो को भी जागरूक करें।जीवन सुरक्षा और कानून सब के लिये एक समान है और उसका पालन प्रत्येक नागरिक का दायित्व है चाहें वह आम जनमानस हो या कोई ख़ाकीधारी,कोई भी संविधान के अंतर्गत निर्मित कानून से परे नही है,परन्तु जो सब से गौर तलब बात है,ख़ाकी नही पहने उसके लिये कानून की परिभाषा कुछ और खाकी पहनते ही परिभाषा और नियम बदल क्यो जाते है,बड़ा सवाल कानपुर नगर के अंतर्गत आने वाले लगभग सभी थाना क्षेत्रों की दो पहिया वाहनों के पुलिसकर्मी हेलमेट का उपयोग क्या पूर्णरूप से प्रतिदिन दिनभर करते है,थाना जीप,डायल 100 एवं अन्य चार पहिया वाहनों के चालक सीट बेल्ट का परिस्पर इस्तेमाल करते है,स्वयं थानों के द्वारा प्रयोग किये जाने वाले वाहनों का रखराखाव आरटीओ के मानकों की पूर्ति नही करता,किसी की नंबर प्लेट अधूरी है तो किसी वाहन को दमे की बीमारी है,पर सवाल तो किया जा सकता नही मामला प्रशासनिक है,कही कानूनी धाराओं के प्रवाह उल्टा न बहने लगे,पर प्रवाह से होने वाली क्षति का बचाव भी प्रशासन द्वारा ही जनता को चौराहें चौराहें लगे कैमरों के रूप में दिया गया है क्योकि कहावत अनुसार कानून तो अंधा है कानून तो सबूत मांगता है,सबूत भी उप्लब्ध है चौराहों पर लगी तीसरी आंख,सरकार ने जनता द्वारा दिये जा रहे टैक्स के पैसों से प्रशासन की सुविधा और जनता की सुरक्षा के लिये जो कैमरे लगवाएं है स्वयं उत्तर दे देंगे,अगर सुचारू रूप से कार्य कर रहे है सब के लिये, डरने और साक्ष्य उप्लब्ध करने की कोई आवश्यकता रह नही जाती।

लेकिन जब कलम उठाया है तो सवाल और जवाब दोनों की हिम्मत संविधान द्वारा प्रत्येक नागरिक को है सिर्फ जागरूकता के आभाव में आम जनता खाकी देख कर घबरा जाती है।

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