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हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया आईरा का चौथा स्थापना दिवस ..... ...

गो आबले हैं पाँव में
फिर भी ऐ रहरवो,
मंज़िल की जुस्तुजू है
तो जारी रहे सफर।।

हर्ष उल्लास धूमधाम से मनाया गया ऑल इंडियन रिपोर्ट्स एसोसिएशन (आईरा) मुख्यालय गीता नगर कानपुर में आईरा का चतुर्थ वार्षिक स्थापना दिवस।।

दिनांक ५ मार्च मंगलवार ऑल इंडियन रिपोर्ट्स एसोसिएशन आईरा का चतुर्थ वर्ष स्थापना दिवस गीता नगर कानपुर मुख्यालय में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया,
समारोह अपराह्न ११ बजे से सायंकाल ५ बजे तक सुनियोजित रूप से आईरा सदस्यों द्वारा कुशलतापूर्वक संचालित किया गया,आईरा पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर स्वतंत्रता सेनानियों के छाया चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं केक काट कर  मनाया गया चतुर्थ स्थापना दिवस,समारोह का संचालन आईरा मुख्य महा सचिव अधिवक्ता श्री पुनीत निगम  द्वारा किया गया,स्थापना दिवस के अवसर पर आईरा द्वारा अपने समस्त प्रदेश मंडल ज़िला पदाधिकारियों एवं सदस्यों का मोमेंटो एवं प्रशस्तिपत्र प्रदान कर किया गया सम्मान,संस्था द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए अन्य संस्थाओं के पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया,समारोह में उपस्थित वरिष्ठ आईरा पदाधिकारियों एवं सम्मानित पत्रकार बंधुओं द्वारा अपने अपने विचार पत्रकारिता एवं पत्रकारों से सम्बंधित सुविचार कि किस प्रकार पत्रकार देश और समाज हित में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है,उपस्थित सभी आईरा सदस्यों का भविष्य के लिए मार्गदर्शन अपने विचार व्यक्त कर किया।समारोह में आईरा की सम्पूर्ण प्रदेश मंडल ज़िला इकाई संग बड़ी मात्रा में सदस्य उपस्थित थे।

एक रोज़ कलम लाएंगी
   बदलाव की सूरत,
  शब्दों से खतरनाक
   शरारा नही होता,

तहज़ीब अदब सलीका
  भी कुछ है जनाब,
झुका हुआ हर शख्स
  बेचारा नही होता।।

आईरा एक शब्द से आगे 

आईरा ऑल इंडियन रिपोर्ट्स एसोसिएशन यह केवल पत्रकारों की संस्था का नाम मात्र नही बल्कि वर्तमान समय में पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रकारों की सबसे बड़ी एवं संगठित एक मात्र संस्था है जो कि वर्तमान में न सिर्फ भारत संग विदेशी धरती पर भी नित्य नए आयामों की बुलंदियों को छूती जा रही है।आईरा की नींव आज से चार वर्ष पूर्व ५ मार्च शनिवार २०१६ को पत्रकारिता के कुंठित काले अध्याय की समाप्ति के विरुद्ध हुआ,जो कि छोटे बड़े पत्रकार श्रेणी की नकारात्मक सोच एवं बीते समय के कुछ तथाकथित संस्थाओं एवं पत्रकारों की मठाधीशी की विकृत मानसिकता की समाप्ति की चुनौती के रूप में हुआ।जिस का बीड़ा आईरा के संस्थापकों (श्री तारिक ज़की, श्री पुनीत निगम, श्री फ़रीद क़ादरी, श्रीमती उर्मिला ठाकुर,श्री तबरेज़ मिर्ज़ा,श्री मोहम्मद मोमिन,श्री नदीम सिद्दीकी,श्री साहिल खान, श्री अजय श्रीवास्तव ) द्वारा या आप दूसरे शब्दों में कह सकते है हमारे और आप जैसे साधारण पर दृणनिश्चित कर्मठशील संकल्पित बुद्धिजीवियों की निःस्वार्थ सोच है,जिसने मात्र चार वर्ष में एक अंकुर से अपनी निःस्वार्थ सोच निष्पक्षता और समाज के हर वर्ग की आईरा में भागीदारी के साथ वर्तमान समय में एक घने वृक्ष का रूप ले चुका है जिसकी जड़े आज भारत के २४ राज्यों सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश संग म्यामार,बांग्लादेश, श्रीलंका,यूके,यूएसए जैसी विदेशी धरती पर भी आईरा इंटरनेशनल के श्री जॉन फ़िलिप्स के नेतृत्व में कार्यरत है।

 आत्मनिर्भर,इच्छुक,राष्ट्रवादी...........आईरा

आईरा धनबल चाटूकारिता एवं किसी चमत्कार के बल पर आज पत्रकारों कि सबसे बड़ी एवं संगठित संस्था नही है बल्कि संस्थापकों के अथक परिश्रम, प्रयास एवं बीते समय में दिये गये तन मन धन एवं सबसे महत्वपूर्ण अपने समय के बलिदान का फल है,जिस प्रकार माता पिता निःस्वार्थ भाव से अपनी संतान का पालन पोषण कर उसके उज्जवल भविष्य की नींव रखने के भांति है।आज आईरा परिवार का प्रत्येक सदस्य चाहें वह किसी भी पद पर संस्था द्वारा निर्वाचित क्यो न हो सुख दुख में एक दूसरे के साथ काँधे से कंधा मिला कर रात दिन निःस्वार्थ भाव से एक परिवार के समान खड़ा रहता है,जिसका श्रेय आईरा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों जिनमें सबसे प्रमुख आईरा राष्ट्रीय मुख्य महासचिव आदरणीय अधिवक्ता श्री पुनीत निगम जी को जाता है जिन्होंने इस संस्था को अपने कुशल नेतृव में एक संगठित परिवार का रूप दिया है

तिलिस्म-ए-ख़्वाब-ए ज़ुलेख़ाओ दाम-ए-बर्दा-फ़रोश

हज़ार तरह के किस्से सफर में होते है ।।

विवधता एवं विशेषता

आईरा का मुख्यालय कानपुर के गीता नगर स्थित है जिसका संचालन आईरा के मुख्य महा सचिव अधिवक्ता  श्री पुनीत निगम के कुशल नेतृव एवं मार्गदर्शन में पत्रकार हितों के साथ साथ समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए सदैव तत्पर रहता है,वर्तमान में आईरा सदस्यों की संख्या हज़ारों में है जो कि समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आते है,आईरा की सबसे बड़ी विविधता जो उसको पत्रकार जगत की अन्य संस्थाओं से अलग करती है वह है किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव(धार्मिक,जाति,आर्थिक स्थिति,शैक्षिकयोग्यता,कार्यक्षेत्र)की बाध्यता न होना,आईरा सदस्य बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण योग्यता सेवा भाव समाज की उन्नति एवं प्रगति की निःस्वार्थ अंतरात्मिक भावना,जो कि मानव जीवन का मूल उपदेश भी है,जिसका समय समय पर कुछ अवसरवादी महत्वकांक्षी ईर्ष्यालु पत्रकार विरोध भी करते है,परंतु इसका यह मापदंड ही इस(आईरा)पत्रकारों की संस्था को एक परिवार के रूप में संगठित किये है जो कि दिन प्रतिदिन सफ़लता के शिखर चूमती जा रही है।

आईरा की कार्य शैली भी उसको अन्य संस्थाओं से अलग करती है,आईरा के चेयर पर्सन श्री तारिक़ ज़की एवं राष्ट्रीय मुख्य महासचिव अधिवक्ता श्री पुनीत निगम के दिशानिर्देश अनुसार आईरा प्रत्येक राज्य में प्रदेश मंडल एवं ज़िला टीम में कार्यरत है,जिसके अपने अलग पदाधिकारी( अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कोषाध्यक्ष, कार्यकरणी सदस्य ) है,जिनका चुनाव राष्ट्रीय समिति एवं सदस्यों द्वारा वोटिंग कर चुनाव द्वारा भी किया जाता है,इसके संग अनुशासन समिति,कोरकमेटी,सहायताग्रुप,महिलाविंग आदि भी आईरा को मज़बूत एवं संगठित करते है,किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता एवं असामाजिक कार्य में लिप्त पाये जाने पर संस्था द्वारा बिना भेदभाव के दोषी आईरा सदस्य पर कार्यवाही की जाती है।अपनी इन विशेषताओं एवं संस्था की संगठित परिवार रूपी सुंदर परिवेष एवं वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन आईरा परिवार को सफ़लता के पथ पर अग्रसर करता जा रहा है जो कि अन्य संस्थाओं के लिए भी प्रेरणादायीं है।

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