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प्रशासन की नाकामी, लखनऊ तक हड़कंप: प्रधान के बेटे की हत्या ...

 सरकारी गनर लेकर पुलिस फोर्स के सामने खेला खूनी खेल: प्रधान के बेटे की हत्या  

मेरठ के बली गांव के प्राथमिक विद्यालय में चल रहे मतदान के समय भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा ने सरकारी गनर लेकर ऐसा खूनी खेल खेला कि लखनऊ तक हड़कंप मच गया। बूथ कैप्चरिंग का विरोध करने पर स्कूल परिसर में गोली मारकर प्रधान के बेटे अनित गुर्जर की हत्या कर दी गई।
दुस्साहस ऐसा कि पुलिस के सामने पिस्टल से फायरिंग कर पूरी मैगजीन खाली कर दी। दूसरी मैगजीन लोड की गई। जबकि मामले में पुलिस-प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने में लगा रहा। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हुई प्रधान के बेटे की हत्या ने सिस्टम पर कई सवाल छोड़ दिए हैं -

मेरठ में पुलिस अफसर कानून व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं। लेकिन जब मौका आता है तो ये दावे हवाई साबित होते हैं। बली गांव में पुलिस बल के सामने प्रधान के बेटे की हत्या कर दी गई और पुलिस बल हत्यारोपी की घेराबंदी के बजाय कमरों में जा घुसी। 

वैसे भी पुलिस के सामने हत्या का यह पहला मामला नहीं है। छह माह पहले कसेरू बक्सर में पुलिस के सामने बसपा के छात्रनेता की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें पुलिस ने एटीएम बूथ में घुसकर जान बचाई थी। अब जाहिर है कि सुरक्षा का भरोसा देने वाली पुलिस ही यदि डरकर पीछे हटेगी तो अपराधियों के हौसले बुलंद ही होंगे।

पहले शहर में प्रह्लाद नगर प्रकरण की शासन तक गूंज हुई। जिसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रह्लाद नगर प्रकरण पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया था कि 30 जून को युवा सेवा समिति के बैनर तले बदर अली ने धारा 144 लागू होने के बाद पुलिस को चुनौती देते हुए पहले फैज-ए-आम कॉलेज में मीटिंग की और उसके बाद जुलूस निकाला।
 बवाल हुआ तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस बवाल में भाजपा नेताओं ने पुलिस अफसरों पर ठीकरा फोड़ा।  जिसके बाद एसएसपी नितिन तिवारी और आईजी रेंज रामकुमार को हटाया गया।
नवागत एसएसपी अजय साहनी ने चार्ज संभालते ही मेरठ में कानून व्यवस्था को सुधारने के दावे किए। लेकिन एसएसपी के दावे हवा में उड़ गये। एसएसपी के चार्ज संभालने के चौथे दिन ही देहात में ऐसा खूनी खेल खेला गया, जिस पर अफसर खामोश हो गये।

प्रधान पुत्र की पुलिस फोर्स के सामने स्कूल परिसर में मतदान केंद्र में गोली मारकर हत्या की घटना ने कानून व्यवस्था को चुनौती दे दी है। 

शहर की घटना से अफसरों ने सबक नहीं लिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि पुलिस फोर्स की मौजूदगी में विजय धामा ने खूनी खेल को अंजाम दिया।
इससे पहले भी पंचायत चुनाव में करीमपुर गांव में बूथ कैप्चरिंग की घटना पर बवाल हुआ था। ललियाना किठौर में पंचायत और जिपं के चुनाव में गोली चलने की घटनाएं हो चुकी हैं।

भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा को सरकारी गनर किसने दिया, इस पर अधिकारी चुप्पी साध गये। यहां तक सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने शुक्रवार को वार्ड-34 जिला पंचायत उपचुनाव को लेकर डीएम अनिल ढींगरा के कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था। सपा जिलाध्यक्ष ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर मतदान प्रभावित करने का आरोप लगाया था

।प्रधान कालूराम के परिजनों और अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि खाकी वर्दी में गनर लेकर विजय धामा मतदान केंद्र पर पहुंचा था। बताया जा रहा कि गनर एक मुजफ्फरनगर के नेता का था, जहां सेटिंग करके विजय धामा सपा और बसपा समर्थित प्रत्याशियों पर धाक जमा सके।
एसपी देहात अविनाश पांडेय ने बताया कि मतदान केंद्र पर दरोगा समेत सात पुलिसकर्मी थे। जबकि प्रत्याशी विजय धामा के रामनगर गांव में पीएसी लगाई गई थी। जबकि पीड़ित परिजनों का आरोप है कि मतदान केंद्र पर 18 से 20 पुलिसकर्मी थे।

ये हैं बड़े सवाल

1-चुनाव को लेकर सुरक्षा के क्यों नहीं किए गए कड़े बंदोबस्त,
2-धारा 144 लागू है तो हथियार क्यों नहीं जमा कराए गए,
3-आखिर मतदान केंद्र पर कैसे पहुंची अवैध पिस्टल,
4-सपा जिलाध्यक्ष द्वारा डीएम को ज्ञापन देने पर भी हल्के में क्यों लेता रहा प्रशासन।
5-दुस्साहसिक वारदात में थानेदार और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की क्या थी जिम्मेदारी।
6-प्रत्याशी विजय धामा सरकारी गनर को लेकर मतदान केंद्र कैसे पहुंचा।

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