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करप्शन और अपराध मुक्त उत्तमप्रदेश के खोखले दावों की खुलीपोल ...

28 लाख की ठगी का आरोपी निकला आयकर इंस्पेक्टर

सीएम योगी आदित्यनाथ की किसी बात का जैसे कोई महत्व ही नही,अरे आप कुछ गलत न समझें,या कोई कटाक्ष नही है प्रदेश की भाजपा शासित सरकार के मुखिया पर,वर्तमान यूपी सरकार सम्पूर्ण प्रदेश में क्या कर रही है,क्या नही कर रही है,इस का लेखा जोखा सरकारी आकड़ो संग जनता के बीच जाकर कोई भी जान सकता है,लेख को विस्तार से पढ़े आप स्वयं ही समझ जायेंगे इशारा किस ओर है।
वर्तमान भाजपा शासित प्रदेश की सरकार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ जी द्वारा प्रदेश में सरकार गठन होते ही अपने पहले संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा था,"प्रदेश को गड्ढा मुक्त,अपराध मुक्त" करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी,अधिकारियों को इसकी रूपरेखा तैयार करने के निर्देश भी तत्काल दिये गए थे,अपराधियो को अपराध छोड़ने या प्रदेश छोड़ने की चेतावनी भी दी गई।
दो प्रमुख वादों में से एक,गड्ढा मुक्त पर तो बात करना हास्यपद है,क्योकि अब बात गड्ढों तक सीमित नही रह गई,क्योकि सड़क पर गड्ढों की श्रेणी वर्तमान में ताल और तलैयों में परिवर्तित हो चूंकि है,ऐसा कदापि नही है कि काम नही हुआ,बहुत हुआ पर कागज़ों पर,जिसके लिए हम सीएम को पूर्णतःदोषी नही ठहरा सकते,पर कही न कही जवाबदेही तो बनती।अब बात करते है कानून व्यवस्था की उत्तर प्रदेश अब उत्तम प्रदेश बन चुका है,क्यो हँसी आई या गुस्सा,मेरा विश्वास न हो तो विभिन्न माध्यमों जो कि सच कहने और बोलने की हिम्मत रखते है द्वारा आप स्वयं जान देख और पढ़ सकते है,उत्तर प्रदेश में शासन के सख़्त दिशानिर्देशों और प्रशासन की लाख मुस्तैदी के बावजूद अपराधियों के हौसले बुलंद है,अपराध का गिराफ़ रोज़ बढ़ता जा रहा है,लूट,हत्या,बलात्कार,साम्प्रदायिक तनाव,घरेलू हिंसा आदि जैसी भिन्न भिन्न घटनाओं में बढ़ोतरी होती जा रही है,शासन की सख्ती न ही प्रशासन का भय कुछ काम आ रहा है,सरकारी तंत्र अगर मुस्तैद है तो अपराधी अपना काम करने में निपुण,जो सबसे गंभीर मुद्दा है वर्तमान सरकार में वह है सरकारी तंत्र का स्वयं किसी न किसी माध्यम से अपराध में लिप्त होने,व्यक्तिगत रूप से तो योगी जी को दोषी ठहराना अनुचित है,परंतु प्रदेश का सीएम होने पर जनता के प्रति उनकी पूरी जवाबदेही बनती क्योंकि सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मानसिकता अपराधियों की भांति,प्रदेश ही नही सम्पूर्ण देश के लिये बहुत ख़राब संकेत है,जिस पर जनता द्वारा चुनी गई देश एवं प्रदेश की सरकार को जल्द से जल्द ठोस फैसले लेने होंगे सिर्फ खानापूर्ति से काम नही होने वाला,क्योंकि ये जनता है सब जानती है।

प्रकाश डालते है ताज़ा मामले पर:

उत्तर प्रदेश के मेरठ में अंचित गोयल नाम के व्यक्ति ने थाना सिविल लाइन थाने में तहरीर दी है कि एक शख्स ने खुद को आयकर विभाग में कमिश्नर बताकर और उन्हे हॉस्पिटल खुलवाने का झांसा देकर उनसे उनके 28 लाख रुपये ठग लिए। फिलहाल पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक जांच में आरोपी आयकर विभाग में कमिश्नर नहीं इंस्पेक्टर निकला है। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

जानिए पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक रुड़की निवासी अंचित गोयल ने  मेरठ के सिविल लाइन थाने पहुंचकर बताया कि उनकी रुड़की में काफी कीमती जमीन है, जिस पर उन्होंने बिजनेस के लिए लोन लेने की प्लानिंग की थी। इसी सिलसिले में उन्होने काफी लोगों से मुलाकात भी की। करीब एक साल पहले उनकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई जो खुद को साकेत निवासी और आयकर विभाग में कमिश्नर बताता था।इस शख्स ने दावा किया था कि उसकी सरकारी महकमों और सरकार में काफी ऊपर तक पहुंच है और वह एक साल के भीतर उनका काम करा देगा। शख्स की बात सुनकर वे काफी प्रभावित हुए थे। और फिर बात आगे बढ़ी और आरोपी युवक ने उनकी व उनके सभी पार्टनर की मुलाकात दिल्ली स्थित होटल में संदीप नाम के शख्स से कराई। संदीप ने बताया कि इतने बड़े लोन के लिए उन्हें एक कंपनी हायर करनी होगी। बात आगे बढ़ती गई और कागजी प्रक्रिया भई शुरू हो गई। एक अस्पताल के एमडी को भी इन लोगों ने अपने साथ जोड़ने की बात कही। अंचित गोयल का आरोप है कि वे उस शख्स के झांसे में आते चले गए। तकरीबन आठ महीने में उन्होंने चेक, कैश व बैंक ट्रांसफर के जरिए करीब 28 लाख रुपये आरोपी को सौंपे। लेकिन काम होता फिर भी दिखाई नहीं दिया।

झूठ का हुआ पर्दाफाश

अंचित के मुताबिक आठ महीने का समय बीतने पर उन्हे शख्स पर संदेह हुआ तो वे अपने साथियों को लेकर पहले मेरठ आयकर ऑफिस और फिर आयकर कमिश्नर लखनऊ से मिले। उन्होंने उस कमिश्नर के बारे में वहां जानकारी जुटाने की कोशिश की तो पता चला कि ऐसा कोई अफसर विभाग में है ही नहीं। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने फर्जी कमिश्नर से संपर्क किया तो वह शुरुआत में हंसी में बात टालता रहा। लेकिन धीरे-धीरे उसने उनसे दूरियां बनानी शुरू कर दीं। और अब वह उनकी कॉल भी रिसीव नहीं कर रहा है। 

आरोपी आयकर कमिश्नर नहीं इंस्पेक्टर निकला

पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि जिस युवक पर ठगी का आरोप है वह आयकर विभाग में कमिश्नर नहीं, इंस्पेक्टर है। लेकिन बड़ा सवाल ये है  कि वह नीली बत्ती लगाकर कैसे चलता है। नीली बत्ती लगी होने के चलते ही उसके कमिश्नर होने पर विश्वास हो जाता था। बताया गया कि आरोपी की पुलिस विभाग में भी अच्छी घुसपैठ है, जिस कारण उसके खिलाफ पूर्व में की गई शिकायतें दबकर रह गईं। 

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