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चांद पर पंहुचने वाला विश्व का चौथा देश बनेगा भारत,जय हो इसरो ...

 चांद पर पहुंचने वाला  विश्व का चौथा देश बनेगा भारत

भारत का अंतरिक्ष सफर अब काफी आगे निकल चुका है और दुनिया के शीर्ष देशों में हमारी गिनती हो रही है।22 अक्तूबर,2008 को पहले चंद्र मिशन के तहत भारत ने चंद्रयान-1 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था।22 अक्तूबर,2018 को पहले चंद्र मिशन के दस साल पूरे हो चुके हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय होड़ सोमवार को उस समय और तेज हो जाएगी,जब भारत अपने कम-खर्च वाले मिशन को लॉन्च करेगा और दुनिया का चौथा ऐसा देश बन जाएगा,जिन्होंने चंद्रमा पर खोजी यान उतारा है।किसी मानव के पहली बार चांद पर उतरने की 50वीं वर्षगांठ से सिर्फ पांच दिन पहले 'चंद्रयान 2' पूरे दशक तक की गईं तैयारियों के बाद आंध्र प्रदेश से सटे एक द्वीप से उड़ान भरेगा।इस मिशन से यह भी सामने आएगा कि अपोलो 11 मिशन के जरिए नील आर्मस्ट्रॉन्ग द्वारा मानव सभ्यता के लिए उठाए गए अहम कदम के बाद से अंतरिक्ष विज्ञान कितना आगे निकल चुका है।

भारत ने 3,84,400 किलोमीटर (2,40,000 मील) की यात्रा के लिए 'चंद्रयान 2' को तैयार करने में 960 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और यह सतीश धवन स्पेस सेंटर से सोमवार को उड़ान भर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 6 सितंबर को उतरेगा।इस मिशन से पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा के रहस्यों को जानने में न सिर्फ भारत को मदद मिली बल्कि दुनिया के वैज्ञानिकों के ज्ञान में भी विस्तार हुआ।

उल्लेखनीय है कि प्रक्षेपण के सिर्फ आठ महीनों में ही चंद्रयान-1 ने मिशन के सभी लक्ष्यों और उद्देश्यों को हासिल कर लिया था। आज भी इस मिशन से जुटाए आंकड़ों का अध्ययन दुनिया के वैज्ञानिक कर रहे हैं। इस मिशन से दुनिया भर में भारत की साख भी बढ़ी और वैज्ञानिकों का मनोबल भी। इसी का नतीजा है कि अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, यानी इसरो चंद्रयान-2 के लॉन्चिंग की तैयारियों को पूरा कर चुका है।

चंद्रयान-2 का उद्देश्य

मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह में मौजूद तत्वों का अध्ययन कर यह पता लगाना कि उसके चट्टान और मिट्टी किन तत्त्वों से बनी है।वहां मौजूद खाइयों और चोटियों की संरचना का अध्ययन।चंद्रमा की सतह का घनत्व और उसमें होने वाले परिवर्तन का अध्ययन।ध्रुवों के पास की तापीय गुणों,चंद्रमा के आयनोस्फीयर में इलेक्ट्रानों की मात्रा का अध्ययन।चंद्रमा की सतह पर जल,हाइड्रॉक्सिल के निशान ढूंढने के अलावा चंद्रमा के सतह की थ्रीडी तस्वीरें लेना।

यह भी जानिए

अमेरिका ने अपने 15 अपोलो मिशनों पर 25 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं,जो आज के मूल्यों के लिहाज से लगभग 100 अरब डॉलर होते हैं।इन मिशनों में वे छह मिशन भी शामिल हैं,जिनके जरिये नील आर्मस्ट्रॉन्ग तथा अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारा गया।चीन ने चंद्रमा पर भेजे जाने वाले अपने चैंगे 4 यान पर 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं।इनके अलावा 1960 और 1970 के दशक में चलाए गए चंद्रमा से जुड़े अभियानों पर आज के मूल्यों के लिहाज से 20 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए।

 

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