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प्रशासनिक उपेक्षा चलते पूरी तरह बदहाल हो चुका शोध संस्थान ...

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के जायस में स्थित मलिक मोहमद जायसी शोध संस्थान के जीर्णोद्धार के लिए 28 लाख रुपए जारी किए हैं। पद्मावत के रचयिता और महान साहित्यकार मालिक मोहमद जायसी की जन्मस्थली जायस की याद में बना मलिक मोहमद जायसी शोध संस्थान प्रशासनिक उपेक्षा चलते पूरी तरह बदहाल हो चुका है स्थानीय लोग शोध संस्थान की बेशकीमती जमीन पर शादी व्याह का आयोजन करते हैं। अमेठी सांसद अभी कुछ दिन पहले अमेठी के दो दिवसीय दौरे पर अमेठी आये थे। यहां उन्होंने जायस में स्थित मलिक मोहमद जायसी शोध संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। शोध संस्थान की स्थिति देखकर राहुल काफी दुखी हुए और दिल्ली पहुंचते ही शोध संस्थान के जीर्णोद्धार के लिए अपने सांसद निधि से 28 लाख रुपए स्वीकृत किए। 28 लाख रुपए में से पहली किश्त के तौर पर 13 लाख रुपए अमेठी प्रसाशन को मिल भी गए है और जल्द ही काम भी शुरू हो जाएगा।

 पद्मावत के रचयिता और महान कवि मलिक मोहमद जायसी की याद में राहुल के पिता पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने मलिक मोहमद जायसी शोध संस्थान का निर्माण कराया था। करोड़ो की बेशकीमती जमीन पर बना संस्थान आज प्रशासनिक उदासीनता के चलते पूरी तरह बदहाल हो चुका है। संस्थान की जमीन पर स्थानीय लोग शादी ब्याह और अन्य कार्यक्रमो का आयोजन करते हैं। संस्थान के मुख्य द्वार पर तांगे वालों ने अपना कब्जा कर रखा है। अब माना जा रहा है कि राहुल के प्रयास से एक बार फिर शोध संस्थान की तस्वीर बदलने वाली है। लोगों का कहना है कि शोध संस्थान बन तो गया लेकिन रखरखाव न होने के कारण बिल्कुल बदहाल हो चुका है।

वहीं जायस के स्थानीय निवासी और सपा नेता जैनूल हसन ने कहा कि मैं सांसद का इसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं कि कम से कम उन्होंने इसके लिए सोचा क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से ये शोध संस्थान बदहाल पड़ा हुआ है उन्होंने 28 लाख रुपए इसके सौन्दरीकरण के लिए दिए है इसके लिए हम सब उनके अभारी है लेकिन आज इस परिसर में जगह-जगह जानवर घूम रहे हैं लोग इसे पेशाब घर बना दिया हैं मलिक मोहम्मद जायसी हमारे पुर्खों की धरोहर हैं उन्हे पूरे विश्व में सब जानते है लेकिन केन्द्र और राज्य में भाजपा की सरकार है और नगर पालिका में भी उन्ही के लोग हैं उनकी भी जिम्मेदारी है कि ऐसे इतिहासिक धरोहरों को सजो के रखा जाए की जिससे लोगों को सूफी संत के बारे में पता चल सके।

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