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वेस्ट यूपी के जिलों में इमरान मसूद का है बड़ा कद ...

राहुल-प्रियंका के बेहद करीबी इमरान मसूद 

इमरान ने अपने दिए एक बयान में कहा है कि "मौजूदा राजनीतिक हालात बताते हैं कि यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी लड़ाई है मैं कल अपने समर्थकों के साथ बैठक करूंगा और फिर अखिलेश जी से समय मांगूंगा।

देश की सियासत का रास्ता तय करने के लिए 'यूपी' वो सीढ़ी है, जो दिल्ली की मंजिल तक पहुंचाने में बहुत मददगार साबित होती है, यही वजह है कि 2024 के सेमीफानल माने जा रहे उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दल पूरी दम खम से जुटे हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी सत्ता में वापसी के लिए हर सियासी-जातिगत समीकरणों पर गहन मंथन कर रहे हैं। वहीं, राहुल-प्रियंका के बेहद करीबी कांग्रेस नेता इमरान मसूद जल्द ही सपा की साइकिल पर सवार हो सकते हैं।

दोनों नेताओं को एक-दूसरे की जरूरत

हाल ही में बीते कुछ चुनाव में कांग्रेस नेता इमरान मसूद कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं, इसलिए वो भी सपा में जाने से योजना काफी पहले से ही बना रहे हैं, इसको लेकर वो समय- समय पर बयान भी देते रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी भी कद्दावर नेता आजम खान की गैर मौजूदगी में चुनाव में उतरने जा रही है। इस वजह से सपा को भी एक बड़े मुस्लिम नेता की तलाश थी। हालांकि, इमरान मसूद का कद सपा के आजम खान जितना बड़ा तो नहीं है, लेकिन इमरान मसूद भी पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। इस वजह से कही ना कही दोनों की तलाश पूरी हो सकती है।

बीजेपी की सपा से सीधी लड़ाई है- इमरान

सूबे के सहारनपुर जिले से ताल्लुख रखने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद (Imran Masood) अपने बयानों के चलते काफी दिनों से चर्चा में हैं। अब तो उन्होंने अपने एक बयान से ये बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि वो कांग्रेस से सारे रिश्ते-नाते तोड़, सपा में घर वापसी कर सकते हैं। इमरान ने अपने दिए एक बयान में कहा है कि मौजूदा राजनीतिक हालात बताते हैं कि यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी लड़ाई है, मैं कल अपने समर्थकों के साथ बैठक करूंगा और फिर अखिलेश जी से समय मांगूंगा। उनके इस बयान के बाद तय हो गया है कि वो बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए सपा की साइकिल का दामन थामेंगे।

जाट-मुस्लिम 'अखिलेश' का बेड़ा पार लगाएंगे

जानकारी के मुताबिक, पश्चिमी यूपी में 26 जिलों की 136 विधानसभा सीट आती हैं, जिसमें मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा समेत कई जिले आते हैं। वहीं, पश्चिमी यूपी में 20 फीसदी के करीब जाट और 30 से 40 फीसदी मुस्लिम हैं। इन दोनों के साथ आने से करीब 50 से ज्यादा सीटों पर जीत लगभग तय हो जाती है। वहीं, 2017 की बात करें तो भाजपा को रेकॉर्ड 136 में से 109 सीट मिली थी, जबकि अखिलेश यादव के हिस्से में 20 सीटें ही आई थी। इसी किले को भेदने के लिए सपा पहले RLD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ गठबंधन कर चुकी है बस सीटों पर बात बननी तय रह गई है। वहीं, इमरान मसूद के साथ आने से बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी होना तय माना जा रहा है।

 

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