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इस देश की राजनीति देश की कौमी एकता अखंडता के लिये घातक बनती जा रही है ...

राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवाद में बाधक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विशेष-

     इस देश की राजनीति देश की कौमी एकता अखंडता के लिये घातक बनती जा रही है। राजनीति के ही चलते राम मंदिर एवं बाबरी का आजादी के समय का विवाद आजादी के करीब सत्तर दशक बाद भी जीवंत ही नहीं है बल्कि राजनैतिक रोटियां सेंकने और कमाने खाने का माध्यम बना हुआ है। मंदिर मस्जिद के इस विवाद के चलते खून खराबा तोड़फोड़ एवं जान तक जा चुकी है इसके बावजूद इस राष्ट्रीय महत्व के विवाद का कोई निपटारा अथवा निर्णायक फैसला नही हो पाया है। पूरी दुनिया जानती है कि राम मंदिर एवं बाबरी मस्जिद के विवाद का मुकदमा शुरू से अदालत में चल रहा है तथा हाईकोर्ट इस विवाद पर अपना फैसला सुना चुका है। इस फैसले को न मानकर दोनों पक्ष ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गये थे। आज भी इस राम मंदिर मस्जिद का विवाद देश की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है और न्यायालय की एक विशेष पीठ मामले के जल्द निपटारा करने के सुनवाई कर रही है। इसी विवाद में एक मुस्लिम पक्ष की ओर से विवादित बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने सम्बंधी एक याचिका दशकों पूर्व उच्च न्यायालय मे दायर की गई थी जिस पर 1994 में फैसला सुनाया गया था।इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी थी जिसकी सुनवाई मूल विवाद के साथ हो रही थी।यह याचिका मूल विवाद के निपटारे में बाधक बनी हुयी थी।सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज करके मूल विवाद के निपटारे में बाधा को दूर कर दिया है। अदालत ने कहा नमाज अदा करने के मस्जिद जरूरी नही है और विवादित स्थल पर 1994 में दिया गया हाईकोर्ट का निर्णय लागू रहेगा। इस फैसले के मूल विवाद का निपटारा करना पीठ के लिये सुगम हो गया है और अदालत की तेजी से लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव के पहले-पहले इस बहुप्रतीक्षित बहुचर्चित संवेदनशील मामले में सुप्रीम का ऐतिहासिक निर्णय आ जायेगा। कल सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला राजनीति में लोग अपने अपने ढंग से देख और प्रस्तुत कर इस पर बहस कर रहे हैं तथा ओवसी जैसे नेता सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को सीधे धर्म में अदालती हस्तक्षेप बता रहे हैं जबकि मुकदमें के पक्षकार इसे ज्यादा महत्व नही दे रहे हैं न्यायालय का फैसला आते ही उस पर राजनीति होनी शुरू होना देश की सर्वोच्च अदालत के भविष्य के लिये कतई शुभ नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस राम मंदिर एवं बाबरी विवाद का राजनैतिक धार्मिक व मजहबी संगठन कभी इस विवाद का फैसला नहीं होने होने देना चाहते है और इस फैसले को लोकसभा चुनाव के बाद फैसला सुनवाई करने की मांग कर चुके हैं।ऐसा सिर्फ इस विवाद को जिंदा रखकर राजनैतिक रोटियां सेंकने तथा धर्म के नाम पर दूकान चलाकर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है। शरीर में पनप रहे कैंसर की तरह देश दुनिया एवं समाज को प्रभावित करने वाले विवाद का अंत अतिशीघ्र होना देश की एकता अखंडता के जरूरी है।

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